Skip to main content

टेलीकॉम सेक्टर अंबानी और एयरपाेर्ट्स अदाणी के एकाधिकार की ओर, विशेषज्ञ बाेले- क्या मोनोपली बोर्ड की जरूरत होगी?

एंडी मुखर्जी. देश की नई अर्थव्यवस्था में अब टेलीकाॅम और एयरपाेर्ट्स जैसे सेक्टर में दो बड़े कारोबारियाें का एकाधिकार होने जा रहा है। इन दाेनाें सेक्टर में मुकेश अंबानी और गाैतम अदाणी अपना वर्चस्व स्थापित कर चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अपनी ऊंची पहुंच के कारण अदाणी पहले से ही निजी हाथाें में साैंपे जा चुके मुंबई एयरपाेर्ट का नियंत्रण भी हासिल कर सकते हैं।

दो साल पहले सरकार ने छोटे हवाई अड्‌डों में फंसी पूंजी को निकालने के लिए निजीकरण की योजना बनाई थी। सबसे ऊंची बोली लगाने के कारण 6 हवाई अड्‌डों की बोलियां अदाणी के पक्ष में गईं। दिल्ली, अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम, लखनऊ, मेंगलुरू और जयपुर जैसे हवाई अड्‌डों के रख-रखाव का काम 50 सालों के लिए उन्हें दे दिया गया। अब मुंबई हवाई अड्‌डे पर भी उनका नियंत्रण होगा। इस तरह 8 से ज्यादा एयरपोर्ट पर उनका नियंत्रण रहेगा।

एयरलाइंस, हवाई यात्रियों और एयरपोर्ट पर बिजनेस करने वालों के लिए यह अच्छी खबर नहीं मानी जा रही। देश में एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में व्यापक ट्रेंड के साथ पावर का केंद्रीकरण चिंताजनक विषय माना जा रहा है। इसी बीच, विशेषज्ञाें ने भारत में माेनाेपली बाेर्ड की जरूरत काे भी रेखांकित करना शुरू कर दिया है।

इधर, मुकेश अंबानी की 2016 में 4जी में एंट्री ने टेलीकॉम सेक्टर को नई ऊंचाई दी। अंबानी ने दुनिया में सबसे सस्ता डेटा देकर करोड़ों यूजर्स को अपने पाले में कर लिया। तब इस सेक्टर में दर्जनभर कंपनियां थीं, लेकिन अब परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। पहले रिलायंस जियो की लॉन्चिंग और अब एजीआर बकाया ने परंपरागत टेलीकॉम कंपनियों की कमर ही तोड़ दी है।

टेलीकॉम सेवा देने वाली अग्रणी कंपनियों में से वोडाफोन-आइडिया अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर हैं कि वह एजीआर के 1.4 लाख करोड़ रुपए कब तक चुकाएगी। एक सवाल यह भी है कि जिनके पास वित्तीय फैसला लेने के अधिकार हैं, ऐसे नीतिगत फैसले लेने वाले इस्तीफा क्यों दे रहे हैं। इन सवालों की जवाबदेही के लिए ही एंटी ट्रस्ट कानून बना है, लेकिन उसका उपयोग अमेजन डॉट कॉम और वॉलमार्ट के आधिपत्य वाले फ्लिपकार्ट में डिस्काउंट ऑफर्स की जांच के लिए हो रहा है, जबकि इन कंपनियों का कुल हिस्सा रिटेल से भी कम है।

बैंकों को रकम की जरूरत सरकार पर बोझ बढ़ा सकती है: मूडीज

इंवेस्टर्स सर्विस की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी के बाद सरकारी बैंकों में फंसे हुए कर्ज में बढ़ोतरी होने से आगामी दो साल में 2.1 लाख करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, इसमें से बड़े पैमाने पर रकम सरकार द्वारा दी जाएगी। नतीजा यह होगा कि सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा। अर्थव्यवस्था के लिए निजी जमा आधारित रिकवरी मुश्किल होगी।

विदेशी निवेश का माहौल बना रहेगा या नहीं, इस पर भी सवाल

2016 में दिवालिया कानून लागू हुआ था। इसमें वैश्विक निवेशकों को कर्ज में फंसी संपत्तियां हस्तांतरित करने का समान अधिकार दिया जाना था। सरकार को ऑस्ट्रेलियन एसेट रिसायक्लिंग मॉडल अपनाने पर 75 लाख करोड़ रुपए का नया निवेश मिलने की उम्मीद थी, लेकिन दिवालिया कोर्ट ने नए केस को लेने से मना कर दिया। इसके कारण टेंडर के दौरान बहुत से एयरपोर्ट एक ही खरीदार को मिल गए। यही कारण है कि काेरोना काल के बाद विदेशी निवेश भारत में आकर्षित होगा या नहीं, इस पर संशय है क्योंकि विश्वस्तर पर रुके हुए कर्ज की कमी नहीं है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
बानी ने दुनिया में सबसे सस्ता डेटा देकर करोड़ों यूजर्स को अपने पाले में कर लिया। (फाइल फोटो)


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/31sOwvR

Comments

Popular posts from this blog

सीएसई रिपोर्ट:स्मॉग केवल दिल्ली-एनसीआर में ही नहीं, गंगा के मैदानों तक फैल चुका; 56 शहरों में वाहन-औद्योगिक प्रदूषण व पराली जलाने से खराब हाल

from देश | दैनिक भास्कर https://ift.tt/3EwCu4O

महाराष्ट्र में अविवाहित युवाओं ने दूल्हा बनकर किया आंदोलन:शादी के लिए लड़की न मिलने से परेशान हैं; सरकार से लड़की ढूंढने की मांग की

from देश | दैनिक भास्कर https://ift.tt/PysH54J