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लाइफ एंड मैनेजमेंट की इस हफ्ते की सारी स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर ...

1. अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति ट्रंप से लोकतंत्र खतरे में है। अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने लोकतंत्र पर यादगार भाषण दिया था। इसे जरूर पढ़ा जाना चाहिए...

ग्रेट स्पीचेस : ‘हमारा लोकतंत्र परफेक्ट नहीं है, पर सुधार अनुभवों से ही होगा’

2. ऑफिस में सबसे अच्छे दोस्त के होने से आप संतुष्ट रहते हैं, प्रोडक्टिव रहते हैं और आपका परफॉर्मेंस भी सुधरता है। अब यदि किसी एक को लीडर बना दिया जाए, तो उसे पूरी ईमानदारी से रिपोर्ट देनी होगी, फिर चाहे दोस्त को बुरा लगे या भला। यदि आप खुद को ऐसी स्थिति में पाएं, तो क्या करेंगे?

टिप्स : आप अपने दोस्त के बॉस बन चुके हैं, ऐसे में क्या करेंगे?

3. ज्ञान और मानसिक दृढ़ता के बल पर ही जीवन की कठिनाइयों से लड़ा जा सकता है। सबसे बड़ी लड़ाई तो आपको अपने विचारों से लड़ना होती है। कैसे जीत हासिल करें, जानने के लिए क्लिक करें...

सेल्फ हेल्प : एक दिन में हजारों नए विचार आते हैं तो सतर्क रहने की जरूरत है

4. टाइटस लीवियस रोमन इतिहासकार थे। इन्हें ‘लीवी’ के नाम से भी जाना जाता है। इन्होंने रोम और रोमन लोगों की मॉन्यूमेंटल हिस्ट्री लिखी थी। इनके विचार पढ़ने के लिए क्लिक कीजिए...

लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स : ग़लतियों को कोसना आसान है, सुधारना मुश्किल



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सीएसई रिपोर्ट:स्मॉग केवल दिल्ली-एनसीआर में ही नहीं, गंगा के मैदानों तक फैल चुका; 56 शहरों में वाहन-औद्योगिक प्रदूषण व पराली जलाने से खराब हाल

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कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, हमें काम के महत्व को समझना चाहिए

कहानी- महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से कांग्रेस के अधिवेशन में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंचे थे। उस समय उन्हें मोहनदास करमचंद गांधी के नाम से ही जाना जाता था। जब वे कोलकाता में कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, तो वहां उनकी मुलाकात घोषाल जी से हुई। घोषाल जी ही कांग्रेस कार्यालय का कामकाज देख रहे थे। गांधीजी ने उनसे कहा, 'मैं यहां काम करने आया हूं। कोई काम हो तो बताएं।' घोषाल जी ने गांधी को देखा तो उन्हें लगा कि ये क्या काम करेगा? कुछ सोचकर वे बोले, 'मेरे पास कोई बहुत बड़ा काम नहीं है। यहां बहुत से पत्र आए हुए हैं। इनमें से जो उपयुक्त हैं, उन्हें अलग निकालना है और उनके उत्तर देना है। क्या तुम ये काम कर सकते हो?' गांधीजी इस काम के लिए तैयार हो गए और उन्होंने पत्रों के जवाब भी दे दिए। घोषाल जी को ये देखकर आश्चर्य हुआ कि एक-एक पत्र को गंभीरता से पढ़ा गया और उनके सही उत्तर भी गांधीजी द्वारा दिए गए। घोषाल जी कार्यालय से निकलने लगे तो उनकी शर्ट के बटन गांधीजी ने लगा दिए। आमतौर ये काम घोषाल जी का सेवक ही करता था। जब गांधीजी ने बटन लगाए तो घोषाल जी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने गा...